Showing posts with label संगीत. Show all posts
Showing posts with label संगीत. Show all posts

Thursday, December 2, 2010

पंचम

पंचम यानी राहुल देव वर्मन ने सत्तर के दशक में भारतीय फिल्म संगीत को एक नया आयाम दिया .इस दौर में गानों में और अधिक ताजगी आ गयी .प्रयोगधर्मी पंचम को मेहमूद ने अपनी पहली फिल्म ‘छोटे नवाब’ में अवसर दिया और पहले गीत ‘घर आजा घिर आए बदरा’ के लिए लता से प्रार्थना की.
अपनी प्रयोगधर्मिता के कारण ही पंचम को टेक्नोलॉजी के प्रति गहरा लगाव था। पंचम ने सचिन देव बर्मन के सहायक के रूप में काम किया और उनकी फिल्मों में कुछ रचनाएं भी की थीं, मसलन, फिल्म ‘प्यासा’ की ‘सिर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए’ और ‘आराधना’ का ‘रूप तेरा मस्ताना’ इत्यादि.
उन्हें पार्श्व संगीत के लिए प्रयोग करना पसंद था, जैसे खाली बोतल में फूंक मारने की ध्वनि ‘शोले’ में इस्तेमाल की है, तो रात भर जागकर बरसते पानी की ध्वनि को रिकॉर्ड किया है.

Friday, April 10, 2009

पुरस्कारों की धनी लता ...

लता जी को छः बार फ़िल्म फेयर पुरस्कार और तिन बार नेशनल पुरस्कार मिल चुका है । दादा साहब फाल्के पुरस्कार और भारत रत्न भी मिल चुका है ।
  • फिल्म फेयर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
  • राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 and 1990)
  • महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार (1966 and 1967)
  • 1969 - पद्म भूषण
  • 1974 - दुनिया मे सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड
  • 1989 - दादा साहब फाल्के पुरस्कार
  • 1993 - फिल्म फेर का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  • 1996 - स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  • 1997 - राजीव गान्धी पुरस्कार
  • 1999 - एन.टी.आर. पुरस्कार
  • 1999 - पद्म विभूषण
  • 1999 - ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  • 2000 - आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  • 2001 - स्टारडस्ट का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  • 2001 - भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न"
  • 2001 - नूरजहाँ पुरस्कार

लता जी ....

  • लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को इन्दोर में हुआ था. पिता दिनानाथ मंगेशकर प्रशिद्ध शास्त्रीय गायक थे.
  • उन्होने अपना पहला गाना मराठी फिल्म 'किती हसाल' (कितना हसोगे?) में गाया था.यह फ़िल्म १९४२ में आई थी ।
  • लता मंगेशकर को सबसे बडा ब्रेक फिल्म'' महल'' से मिला. उनका गाया "आयेगा आने वाला" काफ़ी हिट हुआ।
  • लता मंगेशकर ने 1980 के बाद से फ़िल्मो मे गाना कम कर दिया और स्टेज शो पर अधिक ध्यान देने लगी.
  • वे हमेशा नंगे पाँव गाना गाती हैं.

Sunday, April 5, 2009

किशोर दा की शुरुआत ...

किशोर दा एक ऐसे गायक है जिनके गाने आज पुराने गायकों में सबसे ज्यादा सुने जाते है . एक साधारण शुरुआत से किस तरह शिखर पर चढा जाता है यह किशोर दा से सिखा जा सकता है . किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फिल्म शिकारी (1946) से हुई।इस फिल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका की थी। उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला फिल्म 1948 में बनी फिल्म जिद्दी में। जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया था । यह गाना था'' मरने की दुआएं क्यों मांगू '' , जो काफी हित रहा था लेकिन किशोर दा को वह मुकाम नही मिला जिसके वो हक़ दार थे । किशोर कुमार के। एल। सहगल के ज़बर्दस्त प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया । "जिद्दी" की सफलता के बावजूद उन्हें कोई खास काम नही मिला।
951 में फणी मजूमदार द्वारा निर्मित फिल्म 'आंदोलन' में हीरो के रूप में काम किया मगर फिल्म फ्लॉप हो गई। लेकिन 1954 में बिमल राय की 'नौकरी' में एक बेरोजगार युवक की संवेदनशील भूमिका कर अपनी ज़बर्दस्त अभिनय प्रतिभा से परिचित करवाया । उसके बाद का इतिहास हम सब जानते है , जब उन्होंने अभिनय छोड़ गायकी को गंभीरता से लिया ।

Wednesday, March 4, 2009

रोजा ......

रोजा मणिरत्नम की फ़िल्म थी जो १९९२ में आई । ऐ.आर .रहमान साहब ने पहली बार इसमे म्यूजिक दिया । मुझे अब तक उनका सबसे बढ़िया काम रोजा का संगीत ही लगता है । और भी पसंद है जैसे रंगीला ,ताल ,लगान ,गजनी ,युवा ,आदि ....... पर रोजा की बात ही कुछ और है । स्लाम्दोग के गानों से भी अच्छे मुझे रोजा के गाने लगते है । रोजा फ़िल्म के गीतकार कौन है ? आप जानते है तो जरुर बताइये ।