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Friday, April 17, 2009

अपने बारे में कुछ जानिए ....

लैंडस्टीनर ने १९०० में पता लगाया की सभी मनुष्यों का रक्त एक समान न होकर भिन्न भिन्न होता है ।
प्लाज्मा में हिपेरिन नामक एक पदार्थ होता है जो रक्त को जमने नही देता ।
लार में ताय्लिन नामक एंजाइम होता है । जो मंड को माल्टोज में बदल देता है ।

जब रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो श्वसन की गति बढ़ जाती है । इसे हाइपोक्सिया कहते है । ऐसी स्थिति पहाडो पर होती है ।
प्रत्येक बहुकोशिकीय जंतु में मांसपेशियां पायी जाती है । इन्ही के द्वारा शरीर में गति रहती है ।
हमारे शरीर में कालाजार नामक बिमारी सैंड फ्लाई नामक मक्खी से होता है ।
डायरिया मस्का नामक मक्खी से होता है ।
रुधिर कैंसर को माय्लोजिनस ल्यूकेमिया भी कहते है ।

खून ...

शरीर में रुधिर (रक्त ) के कार्य ....
हिमोग्लोबिन की सहायता से अवशोषित ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न उतकों तक पहुचाता है ।
पोषक पदार्थों , उत्सर्जी पदार्थों ,हारमोंस आदि का परिवहन करता है ।
शरीर के ताप को एक समान बनाए रखता है ।
श्वेत रक्त कणिकाएं जीवाणुओं और विषाणुओं आदि का भक्षण कर रोगों से रक्षा करती है ।
शरीर के किसी भी हिस्से में कट जाने पर रक्त का थक्का जमाने और घाव भरने का कार्य करता है ।
रुधिर शरीर के विभिन्न अंगों में कार्यिक संतुलन बनाए रखने का काम करता है ।