कनाडा सरकार ने भारतीयों को अपने यहाँ प्रवेश पर प्रतिबद्ध लगा दिया था ।
इसी बिच १९१४ में कामागाटामारु प्रकरण हुआ ।
सिंगापूर में ठेकेदारी का काम कर रहे एक भारतीय नागरिक गुरदित सिंह ने एक जहाज किराए पर लिया ।
इस जहाज का नाम कामागाटामारु था ।
उन्होंने दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ भारतीय नागरिकों को लेकर इस जहाज से बैंकोवर जाने का निश्चय किया ।
इस जहाज में कुल 376 यात्री थे । याकोहामा में ग़दर क्रांतिकारियों ने इन यात्रिओं से भेट की ।
जहाज जब बैंकोवर पंहुचा तो इसे बंदरगाह से दूर ही रोक दिया गया ।
कनाडा सरकार के आदेश से इसे कनाडा की जल सीमा से बाहर कर दिया गया।
बाद में अंग्रेजी हुकूमत के आदेश से इसे सीधे कलकाता लाया गया ।
कलकाता के पास बजबज में पुलिस और यात्रियों के बिच जमकर संघष हुआ।
इस संघर्ष में १८ यात्री मारे गए और २०२ को जेल भज दिया गया ।
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Thursday, June 18, 2009
ग़दर
ग़दर आन्दोलन को नविन ऊर्जा देने के लिए १ नवम्बर १९१३ से ग़दर का पहला अंक निकलना शुरू हुआ ।
पहला अंक उर्दू में था । ९ दिसम्बर से यह गुरुमुखी में भी छपने लगा ।
इसमे अंग्रेजी हुकूमत का कच्चा चिटठा छापा जाता था ।
यह एक साप्ताहिक अखबार था जो सैनफ्रांसिस्को से निकलता था ।
इसके माध्यम से यह उजागर किया जाता था की किस तरह अंग्रेज भारतीय सम्पदा को लुट रहे है ।
जनता को सबसे अधिक ग़दर में छपी कविताओं ने प्रभावित किया ।
बाद में ''ग़दर की गूंज'' नाम से सभी कविताओं का एक संकलन भी प्रकाशित किया गया ।
पहला अंक उर्दू में था । ९ दिसम्बर से यह गुरुमुखी में भी छपने लगा ।
इसमे अंग्रेजी हुकूमत का कच्चा चिटठा छापा जाता था ।
यह एक साप्ताहिक अखबार था जो सैनफ्रांसिस्को से निकलता था ।
इसके माध्यम से यह उजागर किया जाता था की किस तरह अंग्रेज भारतीय सम्पदा को लुट रहे है ।
जनता को सबसे अधिक ग़दर में छपी कविताओं ने प्रभावित किया ।
बाद में ''ग़दर की गूंज'' नाम से सभी कविताओं का एक संकलन भी प्रकाशित किया गया ।
Friday, June 12, 2009
मोहम्मद इकबाल
मोहम्मद इकबाल भारत के महान कवियों में से एक थे।
स्वामी विवेकानंद की तरह उन्होंने भी अबाध कर्म पर बल दिया ।
उन्होंने विराग ,ध्यान और एकांतवास की निंदा की ।
इकबाल एक मानवतावादी थे ,जिन्होंने मानव कर्म को प्रमुख धर्म की स्थिति में पहुँचा दिया ।
उनके विचार में स्थिति को निष्क्रिय रूप में स्वीकार करने से बड़ा कोई पाप नही है ।
उन्होंने दूसरी दुनिया में विश्वास की प्रवृति की निंदा की ।
अपनी आरंभिक कविता में उन्होंने देशभक्ति के गीत गए है , पर बाद में वे मुस्लिम अलगाववाद का समर्थन करने लगे ।
स्वामी विवेकानंद की तरह उन्होंने भी अबाध कर्म पर बल दिया ।
उन्होंने विराग ,ध्यान और एकांतवास की निंदा की ।
इकबाल एक मानवतावादी थे ,जिन्होंने मानव कर्म को प्रमुख धर्म की स्थिति में पहुँचा दिया ।
उनके विचार में स्थिति को निष्क्रिय रूप में स्वीकार करने से बड़ा कोई पाप नही है ।
उन्होंने दूसरी दुनिया में विश्वास की प्रवृति की निंदा की ।
अपनी आरंभिक कविता में उन्होंने देशभक्ति के गीत गए है , पर बाद में वे मुस्लिम अलगाववाद का समर्थन करने लगे ।
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