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Wednesday, February 9, 2011

अश्वघोष कनिष्क के दरबार को सुशोभित करते थे ......

कनिष्क कुषाण वंश का तीसरा शासक था । पहला शासक कुजुल कैद्फिसस था ।
कुजुल कैद्फिसस ने काबुल तथा कश्मीर में अपनी सत्ता स्थापित की और सिक्कों पर महाराजाधिराज की उपाधि खुदवाया ।
कुजुल कैद्फिसस के बाद उसका पुत्र विम कैफिसस गद्दी पर बैठा ।
वह शैव धर्म से प्रभावित था । उसके सिक्कों पर नंदी और त्रिशूल की आकृति मिलती है ।
कनिष्क का राज्यारोहण ७८ इस्वी में माना जाता है ।
कनिष्क की राजधानी पुरुषपुर में थी ।
अश्वघोष कनिष्क के दरबार को सुशोभित करते थे ।

Sunday, November 22, 2009

भारत का नेपोलियन -समुद्रगुप्त

समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है । वह अपनी जिंदगी में कभी भी पराजित नही हुआ । उसका विजय अभियान भारत के हर क्षेत्र में कामयाब रहा । प्रथम आर्यावर्त के युद्ध में उसने तीन राजाओं को हराकर अपने विजय अभियान की शुरुआत की । इसके बाद दक्षिणापथ के युद्ध में दक्षिण के बारह राजाओं को पराजित कर उन्हें अभयदान दिया । यह उसकी दूरदर्शी निति का ही परिणाम था ,वह दक्षिण के भौगोलिक परिस्थितियों को भलीभांति समझता था । आर्यावर्त के द्वितीय युद्ध में उसने नौ राजाओं को हरा कर उन्हें अपने साम्राज्य में मिला लिया । बाद में उसने सीमावर्ती राजाओं और कई विदेशी शक्तियों को भी पराजित कर अपनी शक्ति का लोहा मानने पर मज़बूर कर दिया।

समुद्रगुप्त ही गुप्त वंश का वास्तविक निर्माता था । उसका प्रधान सचिव हरिसेन ने प्रयाग प्रशस्ति की रचना की जिसमे समुद्रगुप्त के विजयों के बारें में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है । समुद्रगुप्त ने अश्वमेघ यज्ञ भी करवाया । वह वीणा बजाने में भी कुशल था । उसके दरबार में बुधघोष जैसे विद्वान् आश्रय पाते थे ।

Saturday, November 7, 2009

विश्व का पहला गणतंत्र वैशाली ....

वैशाली बिहार प्रान्त के तिरहुत प्रमंडल का एक जिला है.
वैशाली जिला का मुख्यालय हाजीपुर में है। बज्जिका तथा हिन्दी यहाँ की मुख्य भाषा है।
वैशाली जिला भगवान महावीर की जन्म स्थली होने के कारण जैन धर्म के मतावलंबियों के लिये एक पवित्र नगरी है।

विश्‍व को सर्वप्रथम गणतंत्र का ज्ञान करानेवाला स्‍थान वैशाली ही है.
यहीं पर 599 ईसापूर्व में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्‍म कुंडलपुर ग्राम में हुआ था।
वसाबन सिंह्, बेचन शर्मा, अक्षयवट राय, सीताराम सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण हिस्सा लिया.

सम्राट अशोक ने वैशाली में हुए महात्‍मा बुद्ध के अंतिम उपदेश की याद में नगर के समीप कोल्‍हुआ में सिंह स्‍तंभ की स्‍थापना की थी।

Tuesday, June 30, 2009

अंग महाजनपद

बौद्ध ग्रन्थ अंगउतर निकाय में १६ महाजनपदों का वर्णन है । जिसमे से एक महाजनपद अंग देश है ।
उतरी बिहार के वर्तमान भागलपुर तथा मुंगेर के जिले अंग महाजनपद के अर्न्तगत थे ।
इसकी राजधानी चम्पा थी । महाभारत तथा पुराणों में चंपा का प्राचीन नाम मालिनी प्राप्त होता है ।
दिघ्निकाय के अनुसार इस नगर के निर्माण की योजना प्रसिद्द वास्तुकार महागोविंद ने प्रस्तुत की थी ।
प्राचीन काल में चंपा नगरी अपने वैभव और व्यापार -वाणिज्य के लिए प्रसिद्ध थी ।
अंग के शासक ब्रम्ह्दत ने मगध के शासक भत्तीय को हराकर मगध राज्य के कुछ हिस्सों को जित लिया था पर बाद में मगध द्वारा अंग राज्य को अपने राज्य में मिला लिया गया ।